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Puliyabaazi Hindi Podcast

Author: IVM Podcasts

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Description

This Hindi Podcast brings to you in-depth conversations on politics, public policy, technology, philosophy and pretty much everything that is interesting. Presented by tech entrepreneur Saurabh Chandra and public policy researcher Pranay Kotasthane, the show features conversations with experts in a casual yet thoughtful manner.
48 Episodes
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The future of mobility is autonomous. But it’s hard to imagine that future in Indian conditions where roads occupy spots between potholes, the traffic pattern is Brownian, and non-verbal communication is a lead indicator of vehicular movement. So in this episode, we speak about Indian challenges and opportunities in the autonomous vehicle space. Explicating this history, present, and future of autonomous mobility is Saurabh, who apart from co-hosting Puliyabaazi, runs Ati Motors, a company that makes autonomous cargo vehicles. “ड्राइवर-विहीन वाहन” आजकल अमरीका, चीन और यूरोप में काफ़ी चर्चा में है। लेकिन भारतीय रास्तों पर स्वचालित गाड़ियों की बात कम ही होती है। ख़राब रोड और ट्रैफ़िक नियम की उपेक्षा इतने व्यापक है कि लगता है कोई मशीन इस सड़क की जंग में एक पल नहीं टिक पाएगी। लेकिन सौरभ इस एपिसोड में कहते है कि यह सोच ठीक नहीं। वो कहते है कुछ ख़ास अवसर है भारत के सामने जिन्हें पाने के लिए स्वचालित वाहन के उपयोग को एक नए सिरे से सोचने की ज़रूरत है। क्या है यह अवसर और क्या है स्वचालित वाहन का भारत में भविष्य? सुनिए इस पुलियाबाज़ी में। Puliyabaazi is on these platforms: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi  Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/  Subscribe & listen to the podcast on iTunes  , Google Podcasts, Castbox , AudioBoom  , YouTube  or any other podcast app.
Fake news, disinformation, misinformation, and social media manipulation — these are elements of perhaps the most significant global story of these times. And yet, this phenomenon remains underexplored. We do not fully understand what causes people to generate, share, and believe in fake propaganda. So in this episode, we discuss the anatomy of fake news with Pratik Sinha, editor and co-founder of AltNews — a fact-checking website that debunks misinformation on social and mainstream media. Whatsapp पर शेयर होने वाली झूठी खबरों से तो निश्चित ही आप भी तंग होंगे| इन झूठी खबरों का फैलाव सिर्फ एक मार्केट या सरकार की विफलता का नतीजा नहीं है बल्कि एक सामाजिक कुरीति के रूप में उभरा है | तो इस एपिसोड में हमने पुलियाबाज़ी की “फेक न्यूज़” पर प्रतिक सिन्हा के साथ| प्रतिक ऑल्ट न्यूज़ नाम की फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट के रचयिता है | इस वेबसाइट ने झूठी खबरों का पर्दाफ़ाश करने का बीड़ा उठाया है| तो प्रतीक से हमने चर्चा की इन विषयों पर: Misinformation, disinformation, झूठी ख़बर - इन सब में क्या अंतर हैं? पहले ख़बरों का स्त्रोत सिर्फ़ कुछ एक अख़बार थे। सनसनीख़ेज़ ख़बर की डिमांड तो तब भी उतनी ही रही होगी जितनी अब भी है। तो इंटर्नेट के पहले की झूठी ख़बर और आज के हालात में क्या मूलभूत फ़र्क़ हैं? किस प्रकार की झूठी ख़बर ज़्यादा प्रचलित होती है और किस प्रकार की कम? आयोजित कैसे होती है यह झूठी ख़बर? क्या whatsapp/facebook/ट्विटर इत्यादि पर misinformation की कुछ विशेषताए हैं क्या? मसलन, क्या whastapp पर images के द्वारा फ़ेक न्यूज़ ज़्यादा फैलती है? या facebook में कुछ और ज़रिया है? टीकाकरण से अक्सर तुलना होती है fact-checking की। सरकार का क्या रोल है इस झूठी ख़बर के ख़िलाफ़ टीकाकरण में? Science मैगज़ीन में एक लेख था कि fact-checking शायद काफ़ी नहीं है इस चुनौती से लड़ने के लिए| फिर इसका हल क्या है? आगे क्या चुनौतियाँ है फैक्ट-चेकर्स के लिए? क्या ‘deep fakes’ इत्यादि से भी लड़ेगी altnews? Also, check: Duty, Identity, Credibility: Fake news and the ordinary citizen in India, BBC News  The Global Disinformation Order, Oxford Internet Institute AltNews (English) and AltNews (Hindi) AltNews Android App on Google Play Store Puliyabaazi is on these platforms: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app.
The events surrounding Chandrayaan-2’s landing attempt captured India’s imagination earlier this month. This also gave us a reason to talk about Space on Puliyabaazi again. In our previous episode on space, we discussed the story of ISRO. In this episode, we explore the world of rocketry — the enabling technology for space exploration. Joining us in this conversation is Divyanshu Poddar, co-founder of Rocketeers — India’s first solid fuel-powered model rocket kit manufacturer. Some themes that came up during our conversation: What is the economics of rockets? What is qualitatively different about a rocket that takes us to Low-earth orbit, Geostationary orbit, Moon, and Mars What is the economic potential of space? What has changed now that startups can do rockets instead of nation-states? अंतरिक्ष में अनुसंधान का नाम लेते ही ISRO का ही नाम ध्यान में आता है लेकिन भारत में अब कई कंपनिया उपग्रह, रॉकेट, इमेजिंग इत्यादि पर उम्दा काम कर रही हैं | तो इस बार हमने बात की उनमें से एक कंपनी रॉकेटियर्स के दिव्यांशु पोद्दार से, रॉकेट जगत के बारे में | रॉकेट कैसे बनाए जाते हैं?, किस प्रकार के होते हैं?, रॉकेट टेक्नोलॉजी का भविष्य क्या है? - अगर आप इन सवाल में रूचि रखते हैं तो यह एपिसोड ज़रूर सुने | Puliyabaazi is on these platforms: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app.
The National Registry of Citizens (NRC) has been in the national news recently. So in this episode, we take a step back to understand the causes and dynamics of insider-outsider tensions in North-East India. Joining us is author and journalist Samrat, who has co-edited a book with Preeti Gill on this topic, titled Insider-Outsider: Belonging and Unbelonging in North-East India. Puliyabaazi is on these platforms: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app.
बलोचिस्तान आजकल भारत में एक बहुचर्चित विषय हो गया है | प्रधानमंत्री मोदी ने तीन साल पहले अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में इसका उल्लेख किया | इससे पहले पाकिस्तान ने भारत के एक नागरिक कुलभूषण जाधव को ईरान से कब्ज़े में ले लिया और आरोप लगाया कि भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी R&AW बलोचिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है | तो इस बार की पुलियाबाज़ी बलोचिस्तान पर तिलक देवाशर के साथ | देवाशर जी Pakistan: The Balochistan Conundrum के लेखक है और पाकिस्तान मामलों पर पिछले चार दशकों से काम कर रहे है | उनसे हमने चर्चा की इन सवालों पर: बलोचिस्तान के बारे में सबसे पहले तो यह समझना ज़रूरी है कि आज यह तीन देशों में विभाजित है - यह कैसे हुआ? रही बात सिर्फ़ पाकिस्तानी बलोचिस्तान की तो उसमें भी कई भाषायें, कई जनजातियाँ, कई धर्म है | इसकी क्या कहानी है? क्या इन जनजातियों की भिन्नता के बीच “बलोच एक क़ौम” की भावना आज कमज़ोर हुई है या पहले से और मज़बूत? आज़ादी के वक़्त कलात रियासत का अंग्रेज़ों के साथ क्या arrangement था? ११ अगस्त को कलात किस तरह आज़ाद हुआ और फिर पाकिस्तान का हिस्सा बन गया? पाकिस्तानी बलोचिस्तान की पाकिस्तानी राष्ट्र से आज की तारीख़ में क्या शिकायत है? बलोचिस्तान में पाँचवी बग़ावत चल रही है। हर नयी बग़ावत पिछली बग़ावत से ज़्यादा व्यापक और प्रभावशाली रही है। ऐसा क्यों? आज एक बड़ा मामला है गुमशुदगी का - कई बलोच कार्यकर्ता गुमशुदा हो जाते है एकाएक। यह मानवाधिकार उल्लंघन कैसे और क्यों लगातार जारी है? बलोचिस्तान और कश्मीर में चल रही insurgency में क्या मूलभूत समानताएँ है और क्या मूलभूत फ़र्क़ है? पाकिस्तान की तरफ़ से हमेशा कहा जाता है कि भारत बलोचिस्तान में अस्थिरता का एक बड़ा कारण है। इसमें कितनी सच्चाई है? In this week’s episode, we discuss the political history, present, and future of Balochistan. The Baloch people are spread across three modern nation-states - a handiwork of the British rule. In two of them - Iran and Pakistan - they are an oppressed minority. Pakistani Balochistan itself occupies 44 per cent of Pakistan’s area but accounts for less than 5 per cent of its population. Politically, the idea of the Baloch nation has been at loggerheads with the idea of Pakistan even before the latter’s independence. That struggle continues to this day. What are the roots of this insurgency and what is its likely future? Tilak Devasher, a former R&AW senior official and author of Pakistan: The Balochistan Conundrum joins us in this Puliyabaazi to uncover the politics of Balochistan and its troublesome relationship with the Pakistani State. Reading List: Pakistan: The Balochistan Conundrum, Tilak Devasher A slice of south India in Balochistan, Karthik Venkatesh, Livemint Pakistan: Courting the Abyss, Tilak Devasher Balochistan versus Pakistan, Aasim Sajjad Akhtar, EPW Puliyabaazi is on these platforms: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes , Google Podcasts , Castbox , AudioBoom  or any other podcast app.
बौद्धिक सम्पदा: पेटेंट, कॉपीराइट, और ट्रेड सीक्रेट की कहानी कोका कोला के ट्रेड सीक्रेस्ट फॉर्मूले की कहानियाँ तो सभी ने सुनी है | पर यह कॉपीराइट, पेटेंट, और ट्रेड सीक्रेट आख़िर है क्या? बौद्धिक सम्पदा (Intellectual Property) के अधिकार के यह सभी साधन एक अर्थव्यवस्था के लिए क्या फ़ायदे-नुक़सान लाते हैं? इसी विषय पर सुनिए अगली पुलियाबाज़ी मिहिर महाजन के साथ जो पेटेंट नीति विशेषज्ञ है | कुछ सवाल जिनपर हमारी चर्चा हुई: इंसानी रचनात्मकता की चीज़ें को कैसे प्रॉपर्टी में वर्गीकृत किया जाए? बौद्धिक प्रॉपर्टी पर अधिकार और किसी ठोस प्रॉपर्टी पर अधिकार के बीच क्या अंतर है? Intellectual प्रॉपर्टी में रचयिता को एकाधिकार (monopoly) क्यों दिया जाता है? एकाधिकार की बात विवाद का कारण बन जाती है। एकाधिकार का होना तो एक मार्केट failure होता है। यह तनाव क्यों? आज के दौर में IP की आम परिभाषा ही कुछ डगमगा रही है। ऐसा क्यों? भारत के IP नियम पहले कमज़ोर थे। उसकी वजह से हमको क्या नुक़सान हुए है? इस टूटे ढाँचे को ठीक कैसे किया जाए? One of the issues in the ongoing US-China trade conflict is rampant intellectual property theft by China. This term — intellectual property rights — is one of those which we often hear about but know very little about. Why are such rights important? How do citizens benefit from a sound intellectual property regime? Are anti-trust laws and patent regulations antagonistic to each other? We discuss this and more in a detailed conversation with Mihir Mahajan, a patent strategy expert. Puliyabaazi is on these platforms: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app.
The debate on governmental reform often takes one of these three turns: privatization, nationalization, or devolution. But none of the three narratives provides a comprehensive framework for reforming government organisations. For example, privatization might not always be possible nor advisable. Similarly, devolution of policy and regulatory roles can have adverse effects on efficiency. Nationalization, on the other hand, distorts markets and often leads to terrible outcomes. How then should we think about changing government organisations? Osborne and Plastrik’s classic Banishing Bureaucracy: The Five Strategies for Reinventing Government lays out some general strategies for changing the DNA of government organisations. Pranay and Saurabh discuss ideas from the book relevant to the Indian context. क्यों हमारी ट्राफिक पुलिस इतनी प्रभावहीन है? क्यों एयर इंडिया जैसी सरकारी कंपनी हर दिन पाँच करोड़ का घाटा करती है? HAL जैसे सरकारी संस्थान में क्या सुधार किया जा सकता है? क्यों आज भी सरकारें साबुन बेचने वाली कंपनी चला रही है? इनमें से किसी भी सरकारी संगठन से सरोकार करने की सोच मात्र से हम अक्सर कतराने लगते है | उनकी अक्षमता और निष्फलता सभी को चुभती है | तो इस एपिसोड में हमने चर्चा की कुछ सरकारी संस्थान में सुधार लाने की कुछ रणनीतियों के बारे में | Puliyabaazi is on these platforms: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app.
The semiconductor microchip is perhaps the greatest modern-day innovation breakthrough. It made radios, TVs, computers, and phones happen. Today, a processor microchip has billions of components and is created using a complex supply chain involving thousands of specialised companies cutting across the globe. This trade network with nodes spread all across the world worked seamlessly at most times. Until now that is. Within the last two years, the technological domain has become one of the key battlegrounds of the ongoing geopolitical tussle between the US and China. The US has chosen to use the choke points in the semiconductor manufacturing process to constrain China’s technological growth. Given that this conflict is strategic and not economic, semiconpolitics is here to stay. So in this episode, we deep-dive into the geopolitics of semiconductors. Our guest is Anup Rajput, an engineer par excellence who has worked in the semiconductor industry and currently heads engineering functions at an AI start-up, Inkers Technology Pvt Ltd. In this episode, we discuss: Supply chains of semiconductor chips Why has semiconductor manufacturing become such a contentious topic now? What is the progress China has made on semiconductor manufacturing? How will the geopolitics between China and the US play out? What are the opportunities for India in the semiconductor manufacturing space? सेमीकंडक्टर माइक्रोचिप आधुनिक काल के सबसे क्रांतिकारी अविष्कारों में से एक है | इसके बिना हम कॅल्क्युलेटर, कंप्यूटर, मोबाइल फ़ोन, यह पॉडकास्ट - कुछ भी नहीं बना पाते | वैसे तो माइक्रोचिप का उत्पादन एक गहरा तकनीकी विषय है पर आज इसका प्रयोग एक राजनैतिक अस्त्र के रूप में हो रहा है | अमरीका नहीं चाहता कि चीन उसके वर्चस्व को चुनौती दे और इसी प्रतिस्पर्धा में सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी एक महत्वपूर्ण रोल अदा कर रही है | तो हमने इसी विषय पर पुलियाबाज़ी की अनूप राजपूत से - जो की इस क्षेत्र में पिछले एक दशक से काम कर रहे है| अनूप आजकल एक आर्टिफिशल इंटेलिजेंस स्टार्टअप कम्पनी में इंजीनियरिंग प्रमुख है| हमने की चर्चा इन विषयों पर: सेमीकंडक्टर क्या होता है? इसके उत्पादन की सप्लाई चैन किस तरह पूरे विश्व में फैली है | क्यों इस उत्पादक क्षमता का प्रयोग एक राजनैतिक अस्त्र के रूप में हो रहा है? भारत की इस क्षेत्र में क्या क्षमताएँ है? क्या भारत सेमीकंडक्टर जगत का नया हीरो बन सकता है? Also check out: The semiconductor industry and the power of globalisation, The Economist The decline of computers as a general purpose technology, Thompson and Spanuth, SSRN The technology industry is rife with bottlenecks, The Economist Long-term success of fabs hinges on government policy, Joji Thomas Philip, Mint American Chipmakers Had a Toxic Problem. Then They Outsourced It, Bloomberg Puliyabaazi is on these platforms: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app.
The tussle between the Reserve Bank of India and the Union government has only intensified over the last two years. Governor Urjit Patel resigned in December 2018 and Deputy Governor Viral Acharya resigned earlier this week. Though both of them cited personal reasons there are speculations that the stand-off related to excess funds on RBI’s balance sheet had some role to play. Now there’s nothing new about tensions between a government and a central bank but what’s new is the bone of contention itself because it involves surplus funds rather than disputes over interest rates. There are no set templates from other countries to be followed here. Many central banks are yet to narrow down on the best possible use of such surplus funds and hence the RBI has constituted a committee under former Governor Bimal Jalan to recommend the way ahead. So we took a step back and tried to: explore the history of India’s Reserve Bank, uncover the relationship between the Reserve Bank and the government, and ideate on possible solutions to the current stand-off. Our guest in the episode helping us navigate these choppy waters is Harsh Vora, an investor and trader from Vadodara. Harsh is an alumnus of Takshashila’s Postgraduate Programme in Public Policy and writes on financial matters for Mint. आर्थिक मामलों में कम ही ऐसे मौके आते है जब किसी सरकार की एकाएक लॉटरी खुल जाती है और उसके पास आर्थिक तंगी की बजाए यह सवाल खड़ा हो जाता है कि इस बोनस को किस पर खर्च किया जाए | ऐसा ही एक ऐतिहासिक मौका भारत की रिज़र्व बैंक के सामने आया है | हुआ यह है कि रिज़र्व बैंक के पूंजी भण्डार में लाखों करोड़ रुपए जमा हो चुके है | और वित्त मंत्रालय चाहता है कि बैंक सरकार को अधिशेष पूंजी सौंप दे जिससे सरकार इस रक़म का अपनी मर्ज़ी से उपयोग कर सके | दुसरी ओर कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस पूंजी को हाथ नहीं लगाना चाहिए क्योंकि खराब वित्तीय हालत में यह पूँजी दवाई का काम करेगी | तो हमने इस अवसर का फायदा उठाते हुए चर्चा की रिज़र्व बैंक और सरकार के रिश्तों के बारे में हर्ष वोरा के साथ जो एक इन्वेस्टर और ट्रेडर है | हर्ष तक्षशिला इंस्टीटूशन के पब्लिक पालिसी पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम से उत्तीर्ण हुए है और मिंट अखबार में आर्थिक मामलों पर एक कॉलम भी लिखते है | इस पुलियाबाज़ी में हमने चर्चा की इन सवालों पर: रिज़र्व बैंक एक साथ कई रोल अदा कर रहा है - बैंक को रेगुलेट करना, सरकार की लेन-देन, विनिमय दर (exchange rate) मैनेज करना इत्यादि | ऐसे और क्या क्या रोल है जो RBI कर रही है? सरकार और रिज़र्व बैंक के रिश्ते का इतिहास कैसा रहा है? १९९२ से पहले क्या स्थिति थी? आज क्या है? रिज़र्व बैंक की बैलेंस शीट बड़ी कष्टमय है, क्या-क्या पुरज़े है इसके? रुपए की क़ीमत गिरने से RBI की झोली में पैसा बढ़ रहा है - क्या यह कहना ठीक है? आपदा के लिए रिज़र्व बैंक के पास जो पैसा है यह मात्रा काफी ज़्यादा है - क्या यह कहना ठीक है? इस झमेले को भविष्य में कैसे सुलझाना चाहिए? इस अतिरिक्त राशि का सबसे बेहतरीन उपयोग क्या है? Also check out: Understanding RBI’s Balance Sheet: Is It Sitting On Excess Capital?, BloombergQuint The Raid on the RBI Balance Sheet, Niranjan Rajadhyaksha Mint If Keynes Had Designed India’s Central Bank, Rohan Chinchwadkar, Mint Ambedkar, Rupee, and our Current Troubles, Niranjan Rajadhyaksha, Mint Puliyabaazi is on these platforms: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app.
भारतीय राष्ट्रवाद की ख़ासियत यह है कि वह शुरुआत से ही उदारवादी रहा है | लेकिन आज के ध्रुवीकृत वातावरण में इन दोनों शब्दों को विरोधाभासी समझा जाने लगा है | कुछ राष्ट्र के स्वनियुक्त रक्षक लिबरल विचारधारा को ज़हरीला मानते है तो खुद को लिबरल मानने वाले राष्ट्रवाद नाम से ही कतरा जाते है | तो हमने पुलियाबाज़ी की तक्षशिला इंस्टीटूशन के डायरेक्टर नितिन पई के साथ | नितिन लिबरल-राष्ट्रवाद पर कई लेख लिख चुके हैं | उनका मानना है कि सहिष्णुता और उदारवाद भारतीय राष्ट्रवाद के वह अभिन्न हिस्से है जिनकी वजह से भारत आज एक सशक्त देश बन पाया है | इस पुलियाबाज़ी में हमने चर्चा की इन सवालों पर: क़ौम क्या है? राष्ट्र, क़ौम, वतन, और देश - क्या यह सभी शब्द समानार्थक है? अगर राष्ट्र महज़ एक वैचारिक संकल्पना है, तो क्या उसका महत्व कम हो जाता है? राष्ट्रवाद क्या है? यह शब्द कलंकित क्यों हो गया? भारतीय राष्ट्रवाद और हिन्दू राष्ट्रवाद में अंतर क्या है? भारतीय राष्ट्रवाद में क्या उदारवादी तत्व है? The jingoistic, zero-sum version nationalism is back as a powerful, destructive force on the global stage. Yet a few thinkers believe that a tolerant, civic-minded variant of nationalism is a much better alternative than denouncing nationalism. So in this episode, we explore the liberal side of Indian nationalism with Nitin Pai, Director of the Takshashila Institution. Nitin argues that the nationalism we are overdosing ourselves with is not the inclusive one that created India, but the divisive one that created Pakistan and that those who attack pluralism in the name of nationalism are opening cracks and fissures in the carefully constructed edifice of India’s unity. Also check out: Saving the Nation from Nationalists, Pragati On Liberal Nationalism, The Acorn We Must Reclaim Nationalism from the BJP, The Times of India Liberal Nationalism, An Oxymoron?, on YouTube Why Nationalism, Princeton Press Puliyabaazi is on these platforms: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app.
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Comments (91)

Sanjit Patel

Good podcast on Hayek's theory. very important to understand how economy and politics work. i can somewhat relate this podcast with the book "The Mystery of Banking".

Oct 18th
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Sahil Pal

Brothers your all episodes are compleated waiting for new one

Oct 16th
Reply (1)

Sanjit Patel

i think Listener includes salaried person also. so can we have talk about employees right and employer's duty regarding them including PF, pension, gratuity, salary payment on time and other things or something on impact of recent labour law amendment on employees. pros and cons.

Oct 16th
Reply (2)

Sanjit Patel

excellent talk👌👍

Oct 16th
Reply (1)

Nitin sharma

great show, very well presented and pretty spot on. एक दम सटीक

Oct 3rd
Reply (1)

Amit Doiphode

very very nice information.. thanks

Sep 19th
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ajay nahar

credit ka hindi arth "saakh" ho sakta hai shayad..😊

Aug 25th
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Shiva Lakshmanan

I have been following your talks for sometime and felt that this episode really took the listener to a different plane in terms of thinking. nice work keep it up

Aug 23rd
Reply (2)

hemal shah

content was nice however it should be in some chronological manner. Keep it up and share such information.

Aug 22nd
Reply (1)

ajay nahar

Excellent! You are doing a great job!

Aug 20th
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Rahul Kapoor

bhai iss puliyabazi ka nam badal k bakchodi rakh do..ache bhale topic ki bhasad machadi..

Aug 9th
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Ankit Rawat

we want more content. This podcast is so informative. I listen to it all the time before goin to bed. cheers.

Aug 3rd
Reply (7)

ajay nahar

very very nice! 👌👍

Aug 1st
Reply (2)

Akhil Pathak

superb you guys are awesome 👍

Jul 28th
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Sameer Bhide

can you please have a discussion on the bombay plan 1944

Jul 24th
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Seemant Raj Chourey

really like this episode, working in the same industry. got to know many new things

Jul 15th
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YOGESH PATIL

very good informative podcast puliyabaazi team.india defenitively require fully change in live pattern for upcoming nature event

Jun 20th
Reply (1)

Ikrar Khan

addictive..

May 29th
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hemal shah

kafi liberal information share ki aapne.😉 price is right parameter or rather primary parameter of demand & supply.

May 22nd
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Gautam Goswami

very informative. learned a lot about Genes. the book by Japanese author Kaziuo Ishiguro's Never Let me go, touched upon one of the dystopian ideas discussed here, where human clones are created as supplier of body parts. Thanks.

May 12th
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