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Puliyabaazi Hindi Podcast

Author: IVM Podcasts

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Description

This Hindi Podcast brings to you in-depth conversations on politics, public policy, technology, philosophy and pretty much everything that is interesting. Presented by tech entrepreneur Saurabh Chandra and public policy researcher Pranay Kotasthane, the show features conversations with experts in a casual yet thoughtful manner.
35 Episodes
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Ep. 35: ख़ुफ़िया बातें
जासूसी एक ऐसा पेशा है जिसके बारे में न सिर्फ हम कम जानते है बल्कि अक़्सर सरासर ग़लत भी जानते है | फिल्मों में इस पेशे को इस तरह दर्शाया जाता है कि इंटेलिजेंस अफ़सर कई दिव्य शक्तियों के मालिक लगने लगते है | तो इस बार की पुलियाबाज़ी एक असली इंटेलिजेंस अफ़सर के साथ इस पेशे के बारे में | हमने बात की भारत की ख़ुफ़िया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के भूतपूर्व प्रमुख विक्रम सूद के साथ | यह चर्चा सूद जी की बेहतरीन किताब ‘The Unending Game: A Former R&AW Chief’s Insights into Espionage’ पर आधारित है | चर्चा में उठे कुछ सवाल: इंटेलिजेंस एजेंसी चार प्रकार के काम करती है - collection, analysis, dissemination, और operation| इन चारों को करने के लिए क्या ख़ूबियाँ चाहिए एक अफ़सर में? एक ख़ुफ़िया(covert) ऑपरेशन का मतलब क्या होता है? स्पेशल ऑपरेशन क्या होता है? भारत में ही नहीं पर पूरे विश्व में TECHINT की एक लहर आयी थी लेकिन अब CIA भी मानती है कि HUMINT को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता भले ही टेक्नोलॉजी कितनी ही अच्छी क्यों न हो जाए| ऐसा क्यों?   4."इंटेलिजेंस failure" होता क्या है? आज ख़ुफ़िया एजेंसियों का ध्यान आतंकवाद पर केंद्रित रहता है | इसका एक इंटेलिजेंस एजेंसी पर क्या असर पड़ता है? ३० साल बाद की इंटेलिजेंस एजेंसी को क्या क्या करना होगा? इंटेलिजेंस एजेंसियों में सुधार कहाँ से शुरू किया जाए? Intelligence is one of the oldest professions known. Even the Arthashastra describes in detail the various methods of using spying as a tool of statecraft. And yet, enamoured by glorified portrayals of intelligence agencies on-screen, our knowledge about this discipline has many gaps. So in this episode we spoke to Mr Vikram Sood about the state of the profession today and the challenges faced by intelligence officers. Mr Sood headed India’s premier intelligence agency R&AW between 2000 and 2003. His book The Unending Game: A Former R&AW Chief’s Insights into Espionage is an excellent guide for understanding intelligence and espionage. During the course of this conversation, we discussed: How does the working of an external intelligence agency differ from that of an internal security service like IB, MI5 etc? What does the term ‘covert operation’ mean? How is a special operation different from a covert one? How important is the human element in the intelligence cycle? Can technology replace humans here? What is meant by an intelligence failure? What should be the essential elements of reforming intelligence agencies? Listen in! Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app.
Ep. 34: हमारी राजनीति आख़िर ऐसी क्यों है?
2019 मतदान क़रीब है और राजनीति की हवा किस दिशा में बह रही है, इस पर हर भारतीय का अपना एक मत तो ज़रूर है| अक़्सर लोग कहते हैं कि भारत में राजनीति विचारधाराओं से परे है ; वह केवल नेताओं के व्यक्तित्व, भ्रष्टाचार, या फ़िर जातिगत समीकरण पर केंद्रित है | पर इन आम धारणाओं में कितना सच है, इसी विषय पर इस हफ़्ते की पुलियाबाज़ी राहुल वर्मा (फेलो, राहुल सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च) के साथ| राहुल और प्रदीप छिब्बर की नई किताब Ideology & Identity: The Changing Party Systems of India भारतीय राजनीति की संरचना पर एक गहन अध्ययन है | राहुल से हमने इन सवालों पर पुलियाबाज़ी की: भारतीय राजनीति की विचारधारा के स्तंभ क्या है? स्वतंत्र होने से पहले क्या सोच थी सरकार के समाज में रोल के बारे में ? स्वतंत्र भारत में क्या कहानी रही है? क्या वोट खरीदने से ही सरकारें बन जाती हैं? क्या जाति सबसे बड़ा फैक्टर है हमारी राजनीति में? नेताओं के व्यक्तित्व का क्या असर होता है वोटर पर? एक और मान्यता है कि काडर (संगठन) वाली पार्टिया सफल होती है | कितना सच है इसमें? २०१४ में जो नतीजा आया वह क्यों आया? The 2019 elections are around the corner. Instead of adding to the chatter on electoral predictions, we present an in-depth chat with Rahul Verma (Fellow, Centre for Policy Research) on the structure of Indian politics. Rahul is the co-author of Ideology & Identity: The Changing Party Systems of India, a book that challenges common assumptions that Indian polity is chaotic, clientelistic, corrupt, and devoid of any ideology. Instead, they claim that the most important ideological debates in India are centred on statism-the extent to which the state should dominate and regulate society-and recognition-whether and how the state should accommodate various marginalised groups and protect minority rights from majorities. Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app.
Ep. 33: बुंदेलखंड से उठती खबरों की एक लहर
इस बार की पुलियाबाज़ी भारत के एकमात्र ग्रामीण, नारीवादी न्यूज़ चैनल - ख़बर लहरिया - के साथ | २००२ में स्थापित हुआ यह नेटवर्क अपनी बेबाक रिपोर्टिंग के लिए मशहूर है | तो हमने पुलियाबाज़ी की दिशा मलिक (मैनेजिंग डायरेक्टर) और कविता देवी (डिजिटल हेड) के साथ | पहले हमने बात की खबर लहरिया की सफलताएँ और चुनौतियाँ के बारे में | फ़िर हमने समझने की कोशिश की उत्तर प्रदेश के पिछड़े इलाक़े - बुंदेलखंड - को, ख़बर लहरिया के दृष्टिकोण से | This episode of Puliyabaazi is on India’s only women-run rural media network - Khabar Lahariya. Employing women from Dalit, tribal, Muslim and backward castes, the network has won several national and global awards for their pioneering rural journalism. We spoke to Disha Mullick, Managing Director and Kavita Devi, Digital Head from the Khabar Lahariya team about: How did Khabar Lahariya start? What have been some stages in KL’s development since it came into being in 2002? What challenges do KL’s women reporters face while investigating issues in a patriarchal society? How is rural Bundelkhand like? What are some changes that KL has noticed in governance over the years? सुनिए और बताइये कैसा लगा यह एपिसोड आपको| If you have any comments or questions please write to us at puliyabaazi@gmail.com Follow us on: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app.
Ep. 32: IL&FS से DHFL तक - क्यों लड़खड़ा रहे हैं NBFC?
भारत में तक़रीबन 90 बैंक है पर 10000 ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियाँ (NBFC) हैं जबकि दोनों संस्थाओं का एक ही रोल है - किफ़ायती क़र्ज़ उपलब्ध करा पाना | कोबरापोस्ट वेबसाइट ने इनमें से एक - DHFL - पर जनवरी में आरोप लगाया था कि इस कम्पनी ने 31 हजार करोड़ रुपए का घोटाला किया है! इसे ‘भारत के इतिहास का सबसे बड़ा बैंकिंग स्कैम’ करार दिया गया था।भारत में ही नहीं, पूरे विश्व में NBFC पर नियंत्रण कैसे हो यह एक ज्वलंत विषय है | तो इस एपिसोड में हमने कोशिश की समझने की यह NBFC बला क्या है? इस विषय पर पुलियाबाज़ी के लिए हमारे साथ है दो विशेषज्ञ - हर्ष वर्धन और नारायण रामचंद्रन | हर्ष एसपी जैन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (SPJIMR) में फेलो है | नारायण एक इन्वेस्टर, लेखक, और तक्षशिला इंस्टीटूशन में सीनियर फेलो हैं | इससे पहले नारायण मॉर्गन स्टैनली इंडिया के प्रमुख और RBL बैंक के ग़ैर-कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके है | इस विषय पर पढ़िए हर्ष के विचार ब्लूमबर्गक्विंट पर और नारायण का लेख मिंट अखबार में| इस पुलियाबाज़ी में हमने उनके सामने यह सवाल रखे: ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी मतलब NBFC क्या होती है? NBFC और मिक्रोफिनांस संस्थाओं में क्या अंतर है? इस तरह की कम्पनियों का भारत में फैलाव कैसा रहा है? क्या यह फैलाव दुसरे देशों के समरूप रहा है या फिर भारत की अर्थव्यवस्था में NBFC का प्रचलन ज़्यादा/कम है? और ऐसा क्यों? IL&FS कर्ज पर ब्याज की किश्त चुकाने में असमर्थ रही है। क्या इस वाक़िये से NBFC पर कुछ फर्क पड़ा है? NBFC पर रेगुलेशन में हम कोताई बरत रहे है | तो क्या ग़लत है और उसे ठीक कैसे किया जाए? Soon after IL&FS scam in October 2018 comes another one in January 2019 - the DHFL scam. Terming this as India’s biggest ever banking scam, investigative website Cobrapost alleged a misuse of an astronomical sum of 31,000 crores. Both these companies are classified as Non-Banking Financial Companies (NBFCs). So in this episode, we return to a core issue in the Indian economy - why are they falling apart and how to regulate such institutions. And why do we even need NBFCs in our economy. Harsh Vardhan (Fellow at the Centre for Financial Services, SPJIMR) and Narayan Ramachandran (Senior Fellow, Takshashila Institution) join us as guests for a puliyabaazi on this issue. सुनिए और बताइये कैसा लगा यह एपिसोड आपको| If you have any comments or questions please write to us at puliyabaazi@gmail.com Follow us on: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app. You can listen to this show and other awesome shows on the new and improved IVM Podcast App on Android: https://ivm.today/android or iOS: https://ivm.today/ios
Ep. 31: स्वतंत्र भारत में मतदान की कहानियाँ
2019 के लोकसभा चुनाव नज़दीक आ रहे है | अगले कुछ महीनों में हर नुक्कड़-गली में “कौन बनेगा प्रधानमंत्री” इसी विषय पर वाद-विवाद होगा | तो पुलियाबाज़ी में हमने इस प्रश्न से हटकर मतदान प्रक्रिया को समझने का प्रयास किया | इस पुलियाबाज़ी में हमारे गेस्ट है श्री अलोक शुक्ला जो २००९ और २०१४ के बीच भारत के डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर रह चुके हैं | उनकी नयी किताब Electronic Voting Machines: The True Story इवीएम पर लग रही आलोचनाओं का मुँहतोड़ जवाब देती है | इस पुलियाबाज़ी में हमने उनके सामने यह सवाल रखे: संसद चुनाव के लिए प्रक्रिया कब और कैसे शुरू होती है ? चुनाव आयोग एक स्वतन्त्र संवैधानिक संस्था है - इस संरचना का ECI अफसरों पर आपके मुताबिक क्या फ़र्क पड़ता है? क्या सब पार्टियाँ चुनाव आयोग के पास चुगली करने आती रहती है? EVM के आने से पहले क्या तकलीफें होती थी चुनाव करवाने में ? EVM का आईडिया कब पहले आया? क्या क्या विरोध रहे है EVM के ख़िलाफ़? EVM और राजनैतिक दलों का रिश्ता कैसा रहा है? EVM की छवि सुधारने के लिए ECI को क्या करना चाहिए? In the 1971 General Elections, it was alleged that ballot papers were tampered using vanishing and reappearing ink such that the vote stamp miraculously disappeared from another candidate and reappeared against the Congress candidate instead. This is not different from today when political parties blame the Electronic Voting Machine for their losses. So in this episode, we investigate the Indian electoral process and the EVM itself. To help us understand this better, we are joined by Dr Alok Shukla who served as Deputy Election Commissioner between 2009 and 2014. Dr Shukla has served as an international observer for elections in several countries and has been decorated with the Prime Minister’s Award for Excellence in Administration in 2010. His latest book Electronic Voting Machines: The True Story is an authoritative account on electronic voting machines. सुनिए और बताइये कैसा लगा यह एपिसोड आपको और निश्चिंत होकर अपने उम्मीदवार को चुनिए २०१९ लोकसभा मतदान में | If you have any comments or questions please write to us at puliyabaazi@gmail.com Follow us on: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app. You can listen to this show and other awesome shows on the new and improved IVM Podcast App on Android: https://ivm.today/android or iOS: https://ivm.today/ios
Ep. 30: लश्कर-ए-तय्यबा: कब, क्यूँ, और कैसे
26 नवंबर 2008, मुंबई की दर्दनाक तस्वीरें आज भी दिल दहला देती हैं | इस हमले को अंजाम दिया था पाकिस्तान सेना के पसंदीदा आतंकवादी गुट - लश्कर-ए-तैयबा ने | इस हादसे के 11 साल बाद भी, हम कम ही जानते है कि यह संगठन शुरू कैसे हुआ, किस मक़सद से हुआ, और इसके हथकंडे क्या है | तो हमने की पुलियाबाज़ी प्रॉफ़ेसर क्रिस्टीन फेयर से, जिन्होंने हाल ही में इस संगठन पर एक किताब ‘In Their Own Words: Understanding the Lashkar-e-Tayyaba’ लिखी है | फेयर जार्जटाउन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रॉफेसर है और पाकिस्तान सेना पर किये गए अपने उल्लेखनीय शोधकार्य के लिए जानी जाती है | उनसे हमने इस आतंकवादी गुट एक संगठन के रूप में समझने के लिए यह सवाल सामने रखे: In this episode, we explore one of the most important nodes of the Pakistani military-jihadi complex: the Lashkar-e-Tayyaba (LeT). Our guest for this episode is Prof Christine Fair, a renowned voice on Pakistan security issues. In her latest book In Their Own Words: Understanding the Lashkar-e-Tayyaba, Dr Fair reveals finer details about LeT using publications produced and disseminated by Dar-ul-Andlus, the publishing wing of LeT. In this Puliyabaazi, we investigate LeT using organisation theory. What are their vision and mission statements? What keeps them together? How do they recruit employees? Who are their shareholders? And finally, what will it take to end this organisation? Listen in for an in-depth discussion on these questions. सुनिए और बताइये कैसा लगा यह एपिसोड आपको | If you have any comments or questions please write to us at puliyabaazi@gmail.com Follow us on: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app.
Ep. 29: अम्बेडकर के जातिप्रथा पर विचार: भाग २
पूरे भारत ने अपना सत्तरवाँ गणतंत्र दिवस पिछले हफ़्ते मनाया और अंबेडकर के योगदान को फिर एक बार याद किया | पर अंबेडकर साहब जैसे बुद्धिजीवी को सम्मान देने का शायद सबसे प्रभावशाली तरीका है उनके विचारों को समझना | अब उनको पुलियाबाज़ी में ला पाना तो संभव नहीं है इसलिए इस बार हमने प्रयत्न किया उनके कुछ लेख पढ़ने का और उनके तर्क को आपके सामने रखने का | इस दो भाग स्पेशल में हमने विश्लेषण किया अंबेडकर के जातिप्रथा पर कुछ विचारों का | भाग 2 में में सुनिए चर्चा उनके सबसे प्रसिद्ध लेख - Annihilation of Caste - पर | अंबेडकर ने यह भाषण 1936 में लाहौर के जात-पात तोड़क मंडल के लिए तैयार किया था पर यह लेख इतना धमाकेदार था कि मंडल ने इसे प्रकाशित करने से मना कर दिया | अंत में अंबेडकर ने खुद इसे प्रकाशित किया | जातिप्रथा का उन्मूलन क्यूँ और कैसे किया जाए - यह लेख इन सवालों पर केंद्रित है | यह लेख इतना प्रसिद्ध हुआ कि गांधीजी ने भी इस पर अपने विचार रखे और अपनी असहमति के कारण समझाए | इस एपिसोड में हमने इस बेहद ज़रूरी वाद-विवाद पर चर्चा की है | सुनिए और बताइए कैसा लगा आपको| साथ ही इस सीरीज़ के भाग १ में हमारी चर्चा सुनिए उनकी किताब The Untouchables पर | If you have any comments or questions please write to us at puliyabaazi@gmail.com Follow us on: Twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi Instagram: https://www.instagram.com/puliyabaazi/ Subscribe & listen to the podcast on iTunes, Google Podcasts, Castbox, AudioBoom, YouTube or any other podcast app. You can listen to this show and other awesome shows on the new and improved IVM Podcast App on Android: https://ivm.today/android or iOS: https://ivm.today/ios
Ep. 28: अम्बेडकर के जातिप्रथा पर विचार: भाग १
गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम भीमराव अम्बेडकर के योगदान को अक़्सर सलामी देते हैं | पर अम्बेडकर साहब जैसे बुद्धिजीवी को सम्मान देने का शायद सबसे प्रभावशाली तरीका है उनके विचारों को समझना| अब उनको पुलियाबाज़ी में ला पाना तो संभव नहीं है इसलिए इस बार हमने प्रयत्न किया उनके कुछ लेख पढ़ने का और उनके तर्क को आपके सामने रखने का | इस दो भाग स्पेशल में हमने विश्लेषण किया अम्बेडकर के जातिप्रथा पर कुछ विचारों का | भाग १ में सुनिए चर्चा उनकी किताब The Untouchables  पर | भाग २ में सुनिए चर्चा Annihilation of Caste पर | अम्बेडकर के काफ़ी लेख विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर आसानी से उपलब्ध है | पढ़िए और अपने विचार ज़रूर शेयर कीजिये हमारे साथ |
Ep. 27: एक नई विश्व व्यवस्था के लिए भारत कैसे तैयारी करे?
विश्व व्यवस्था के घटनाक्रम में हाल ही तीव्रता से बदलाव हुए हैं। अमरीका और चीन के बीच में 1971 से शुरू हुआ तालमेल का सिलसिला आज एक शीत युद्ध में तब्दील हो गया है। बदलते समीकरणों के चलते अगले २५ सालों में भारत को क्या कदम उठाने चाहिए, इस विषय पर है हमारी इस हफ़्ते की पुलियाबाज़ी | इस पुलियाबाज़ी में सौरभ और प्रणय ने इन सवालों पर चर्चा की: १. “विश्व-व्यवस्था” शब्द का अर्थ क्या है? २. ऐतिहासिक तौर पर किस प्रकार की विश्व-व्यवस्थाएं रह चुकी है? ३. अमरीका और चीन के मनमुटाव के चलते भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा? ४. विश्व-व्यवस्था में आख़िर बदलाव अब क्यों आ रहा है? ५. क्या चीन अमरीका को विश्व के सबसे ताक़तवर देश के रूप में विस्थापित कर सकता है? सुनिए और कहिए कैसा लगा आपको @puliyabaazi या फिर puliyabaazi@gmail.com पर। It’s nearly impossible to read a book on geopolitics today without the mention of the phrase A New World Order. Many claims of this New World Order narrative need deeper investigation, starting from these questions: what constitutes a world order? How was the US able to reach this position of a world leader after the World War II? What are the odds that China will replicate this feat? And finally, in what ways can India shape the world order? These are the questions we tackle in this week’s episode. Recommended reading and listening on this topic: Takshashila Discussion Document on ‘India’s Strategies for a New World Order’ Pranay Kotasthane on ‘Ingredients of a New World Order’ The Pragati Podcast episode on ‘A New Brave World Order’ Opinion piece in Rajasthan Patrika ‘भारत कैसे तैयारी करें नयी विश्व-व्यवस्था से निपटने के लिए’ If you have any comments or questions please write to us at puliyabaazi@gmail.com Follow us on twitter: https://twitter.com/puliyabaazi Follow Puliyabaazi on Facebook: https://www.facebook.com/puliyabaazi/
Ep. 26: भाग रॉकेट भाग: भारत के अंतरिक्ष प्रोग्राम की कहानी
अंतरिक्ष खोजने की चाह हज़ारों साल पुरानी है। लेकिन अंतरिक्ष तक पहुंचने की क्षमता केवल सत्तर साल पुरानी है। और भारत उन चुनिंदा देशों में से है जिसने इस खोज में कई झंडे गाढ़े है। तो इस बार पुलियाबाज़ी में हमने भारत के अंतरिक्ष प्रोग्राम पर खुलकर चर्चा की पवन श्रीनाथ से, जो इस विषय पर काफ़ी सालों से शोधकार्य कर रहे हैं। पवन तक्षशिला संस्थान में फेलो है और थले-हरटे (कन्नड) और प्रगति (अंग्रेज़ी) पॉडकास्ट के होस्ट है। हमने इन सवालों पर बातें की इस एपिसोड में: 1. एक ग़रीब देश के अंतरिक्ष प्रोग्राम को स्थापित करने की सोच कहाँ से शुरू हुई? 2. किस तरह यह प्रोग्राम दिल्ली से दूर कई राज्यों में वितरित रहा। 3. उपग्रह और लॉन्च वेहिकल - इन दोनों घटकों पर इसरो का प्रदर्शन कैसा रहा है ? 4. SpaceX जैसी निजी संस्थाओं ने इसरो के सामने क्या चुनौतियाँ रखी हैं? सुनिए और बताइये कैसा लगा आपको @puliyabaazi या फिर puliyabaazi@gmail.comपर। In this episode of Puliyabaazi we take a close look at India's space programme with Pavan Srinath, fellow and faculty at the Takshashila Institution and a host of Thale-Harate and Pragati podcasts. We discussed the impact that space research has for an aspirational society and why the argument 'poor nations shouldn't spend on luxuries like space exploration’ makes little logical sense. We then move on to discuss the beginnings of India's tryst with space. Pavan then takes us through the two components of the space programme - satellites and launch vehicles. Do let us know in puliyabaazi@gmail.com if you have any thoughts to share.
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Comments (49)

hemal shah

ज्ञान वर्धक वार्तालाप। keep it up guys. @ivmpodcasts

Apr 20th
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shubham jha

you guys are amazing.. keep up the good work.. really informational

Apr 18th
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Nitin sharma

when is your next podcast is coming comma waiting for . long time no see

Apr 10th
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Puliyabaazi Hindi Podcast

Nitin sharma We release an episode every alternate Thursday, Nitin.

Apr 11th
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Sahil Verma

bhai thoda jaldi Nikal Dia karo episodes.

Apr 9th
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hemal shah

you are back after long time. great come back. please publish show twice in week..

Apr 4th
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Maksood Ansari

There is problem of voice quality but the content is superb as always. keep it up guys

Mar 22nd
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Puliyabaazi Hindi Podcast

Maksood Ansari shukriya Maksood. We'll keep improving.

Mar 22nd
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priya Choudhary

Great work 👍👍

Mar 20th
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Rakesh Yadav

why we are not studying this books in School and Collage....

Mar 17th
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Sharad Patel

Great introduction to the topic !

Mar 7th
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Puliyabaazi Hindi Podcast

Sharad Patel शुक्रिया। सुनते रहिये और अपने दोस्तों को पुलियाबाज़ी के बारे में ज़रूर बताइये।

Mar 8th
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ashish khorgade

You both doing excellent job. Keep on doing it. I love the topic related to Indian history. Mostly topics are India centric. Global topics can also be appreciated. Ill like to hear from you info on different Indian states, Indian & world legends. Pls don’t stop keep going, as puliyabaazi is now a Habit.

Mar 3rd
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abhimanyu jamwal

ashish khorgade Hello Ashish, we are new on Castbox, trying to reach out to people who like conversations. Do give our podcast "Ainterview with Abhimanyu" a shot. We would love to have your feedback. Cheers, keep listening🎧

Mar 25th
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Puliyabaazi Hindi Podcast

ashish khorgade thanks Ashish. Dil khush kar diya aapke comment ne. Koshish jaari rahegi.

Mar 4th
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ajay nahar

Excellent

Feb 27th
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Richard Hood

Lagaan ki Head Coach Elizabeth ki yaad aayi yeh episode sunke

Feb 17th
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Puliyabaazi Hindi Podcast

Richard Hood :)

Feb 17th
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Jainendra Kumar

shukriya! itni khubsurati aur sahaj tareeke se samjhane ke liye. :)

Feb 8th
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Shashank Kumar

ऐसे विषय को अपने प्रोग्राम के शामिल करके आपने बड़ी साहस दिखाई, धन्यवाद् !!

Feb 4th
Reply

Abhinav Saxena

Love this podcast - I hardly enjoy any hindi content, but this podcast is an exception. Hosts always select interesting and relevant topics and don't over simplify the discussion, and hence always get to learn something new. Episodes on China and Ambedkar are specially worth mentioning.

Jan 31st
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Puliyabaazi Hindi Podcast

Abhinav Saxena शुक्रिया अभिनव। और कोई विषय जिसपर पुलियाबाज़ी सुनना चाहेंगे आप?

Feb 1st
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pulkit singhai

insightful conversation!! i would have loved if you had discussed something about the book "worshipping false gods" too (from Shourie).

Jan 31st
Reply

pulkit singhai

Puliyabaazi Hindi Podcast haan sir please. many thanks for puliyabaazis

Jan 31st
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Puliyabaazi Hindi Podcast

pulkit singhai thanks. padhi nahi hai woh kitaab. Ab padhenge aapne kahaa hai toh - Pranay

Jan 31st
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Sahil Verma

when are you going to start the mass production of these episodes?want more please

Jan 28th
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Puliyabaazi Hindi Podcast

Sahil Verma hi Sahil. So happy to see this message. We will keep trying.

Jan 29th
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Aditya Yadav

nice

Jan 28th
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Shashank Kumar

bahut himmat dikhai bhai ye video bna ke aapke video me ek jagah pucha gya hai ki daliton ne cow eating kyu nhi choda ? because unhe jinda rhne ke liye us time koi aur option hi nhi tha, unhe dead animals ke meat khane pdte the even animal ke gobar me se anaj nikal ke khane pdte the..koi vegetarian chiz nhi available thi.

Jan 25th
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Puliyabaazi Hindi Podcast

Shashank Kumar shukriya! Thanks for your comment.

Jan 26th
Reply

ra one

Good.

Jan 24th
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